--- राहुल गाँधी ने श्रमिक ट्रेन पर फैलाई फर्जी खबर: कहा- सरकार ने मुनाफा कमाया, जानिए क्या है सच लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---
फर्जी खबरों और भ्रामक दावों के माध्यम से कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार (जुलाई 25, 2020) को उन्होंने स्पेशल श्रमिक ट्रेनों को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया। आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों में वापस भेजने के नाम पर ट्रेनों का परिचालन कर सरकार भारी मुनाफा कमा रही है।
ट्विटर पर राहुल गाँधी ने एक भ्रामक शीर्षक के साथ एक खबर शेयर की। इसमें लिखा था, “रेलवे ने श्रमिक ट्रेनों से भी की जमकर कमाई!” राहुल गाँधी का मकसद यह जताना था कि मोदी सरकार श्रमिक ट्रेनों के माध्यम से कोरोना वायरस के दौरान मुनाफ़ा कमा रही है।
राहुल गाँधी द्वारा साझा की गई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रेलवे ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान फँसे प्रवासी कामगारों को घर पहुँचाने में 428 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रेलवे ने 1 मई से लगभग 63 लाख प्रवासी कामगारों को घर पहुँचाया था, जिससे 428 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।
राहुल गाँधी ने ट्वीट किया, “बीमारी के बादल छाए हैं, लोग मुसीबत में हैं, बेनिफिट ले सकते हैं। आपदा को मुनाफे में बदलकर गरीब विरोधी सरकार लाभ उठा रही है।”
बीमारी के ‘बादल’ छाए हैं, लोग मुसीबत में हैं, बेनिफ़िट ले सकते हैं – आपदा को मुनाफ़े में बदल कर कमा रही है ग़रीब विरोधी सरकार। pic.twitter.com/YSUsxIpSvC
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 25, 2020
राजस्व (रेवेन्यू) और लाभ (प्रॉफिट) के बीच अंतर कर पाने में असमर्थ राहुल गाँधी ने यह कहकर जनता को गुमराह करने का काम किया कि मोदी सरकार ने आपदा के दौरान श्रमिक ट्रेन सेवाओं से लाभ कमाया और सरकार की नकारात्मक छवि पेश करने का प्रयास किया।
क्या रेलवे ने श्रमिक ट्रेनें चलाने से लाभ कमाया?
राहुल गाँधी के इस दावे के विपरीत कि भारतीय रेलवे ने विशेष श्रमिक ट्रेनें चलाकर बहुत लाभ कमाया, रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने पर 2,142 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और बदले में सिर्फ 429 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया।
राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में यह दावा करते हुए फर्जी खबरें फैलाई कि भारतीय रेलवे ने 429 रुपए का ‘लाभ’ कमाया, जबकि वो यह विभेद नहीं कर पाए कि यह ‘अर्जित राजस्व’ था, ना कि कुल लाभ।
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से फँसे प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए श्रमिक ट्रेनों को चलाने के बाद रेलवे को लगभग 1,700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। एक आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेलवे ने 29 जून तक केवल 428 करोड़ रुपए कमाए हैं और 4,615 श्रमिक ट्रेनें चलाई हैं।
रेलवे ने अपने खर्च के बारे में जानकारी साझा की, जिससे पता चलता है कि उसने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में प्रति यात्री 3,400 रुपए खर्च किए, जो कुल 63 लाख प्रवासी श्रमिकों पर 2,142 करोड़ रुपए हैं। रेलवे ने राज्यों से इसकी लागत का केवल 15% वसूल किया और बाकी 85% उसने खुद वहन किया गया।
गुजरात सरकार ने अकेले कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान 1,027 श्रमिक विशेष ट्रेनों में 15 लाख से अधिक फँसे हुए प्रवासी श्रमिकों को उनके घर तक पहुँचाने के लिए रेलवे को 102 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
गुजरात के बाद, महाराष्ट्र ने 844 ट्रेनों में 12 लाख श्रमिकों को परिवहन के लिए रेलवे को 85 करोड़ रुपए का भुगतान किया। देश के पश्चिमी राज्यों की ही तर्ज पर, तमिलनाडु ने 271 ट्रेनों में अपने गृह राज्यों में लगभग 4 लाख प्रवासी श्रमिकों को घर ले जाने के लिए 34 करोड़ रुपए का भुगतान किया।
हालाँकि, राहुल गाँधी मोदी सरकार पर निशाना साधने की जल्दी में, ‘राजस्व’ और ‘लाभ’ के बीच अंतर करने में विफल रहे हैं, और इस पर अपनी जानकारी दुरुस्त करने के बजाए उन्होंने श्रमिक ट्रेनों के बारे में जनता को गलत जानकारी देने की कोशिश की।
ऐसा असफल प्रयास कर राहुल गाँधी ने सेल्फ गोल करते हुए सिर्फ और सिर्फ अपने निजी और अपनी पार्टी की कुछ ‘उपलब्धियों’ में एक और कारनामा जोड़ने का काम किया है।
from ऑपइंडिया https://ift.tt/2ZYrMmM
No comments:
Post a Comment