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Tuesday, July 28, 2020

बकरीद पर उद्धव सरकार ने कॉन्ग्रेसी नेताओं की नहीं मानी बात, कहा- MHA की गाइडलाइन का होगा पालन

उद्धव सरकार का बकरीद पर बदला फैसला

--- बकरीद पर उद्धव सरकार ने कॉन्ग्रेसी नेताओं की नहीं मानी बात, कहा- MHA की गाइडलाइन का होगा पालन लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के दबदबे को देखते हुए कुछ समय पहले खबर आई कि राज्य सरकार ने बकरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करने का फैसला किया है। हालाँकि,अब इस बात पर स्थिति स्पष्ट करते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि बकरीद के लिए राज्य सरकार कोई नई गाइडलाइन नहीं जारी करेगी। त्यौहार के लिए उन्हीं दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा जो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी किए हैं। मलिक ने बताया कि उद्धव ठाकरे ताजा दिशा-निर्देश जारी करने को तैयार नहीं हुई हुई।

यहाँ बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने एक हफ्ते पहले ईद को लेकर गाइडनाइन जारी की थी जिसमें सुरक्षा लिहाज से प्रतीकात्मक कुर्बानी के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे और घर पर रहकर नमाज पढ़ने की सलाह दी गई थी। लेकिन, महाअघाड़ी सरकार के अन्य दल व उनके नेताओं को यह बात संतोषजनक नहीं लगी और उन्होंने इस पर आपत्ति भी जताई।

इसके बाद इस मामले के मद्देनजर कई मुस्लिम नेता एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिले। उनके समक्ष मामला रखकर फिर गृहमंत्री अनिल देशमुख और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने सीएम ठाकरे से मुलाकात की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, महाअघाड़ी सरकार के मंत्री अनिल देशमुख के साथ कई नेता शामिल हुए। इस बैठक में गाइडलाइन एक बार निकाले जाने के बाद अनुरोध किया गया कि ईद के लिए छूट दी जाए। नेताओं ने कहा कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग आदि को मेंटेन करके इस त्योहार के रिवाजों को मनाएँगे।

यहाँ गौरतलब है कि पिछले दिनों कोरोना के बढ़ते संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बकरीद के मौके पर प्रतीकात्मक कुर्बानी का सुझाव दिया था। मगर, प्रतीकात्मक बकरीद मनाने के फ़रमान पर उन्हीं की पार्टी के मुस्लिम नेता नाराज हो गए। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री आरिफ़ नसीम खान ने सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी।

खान ने कहा था, “हमारी मुख्य आपत्ति दो मुद्दों पर है। सबसे पहले, क़ुर्बानी प्रतीकात्मक रूप से नहीं की जा सकती है और अधिकांश लोगों को बकरियों को ऑनलाइन खरीदने के बारे में पता ही नहीं है। वहीं इस्लाम भी प्रतीकात्मक क़ुर्बानी देने की मंज़ूरी नहीं देता। फिर बकरा ख़रीदने से पहले उसकी सेहत, वजन सब कुछ देखना पड़ता है उसके बाद ही क़ुर्बानी दी जाती है। जोकि ऑनलाइन संभव नहीं है। सरकार को नए दिशानिर्देश जारी करने चाहिए क्योंकि वर्तमान दिशानिर्देश मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं।”

वहीं कॉन्ग्रेस के विधायक अमीन पटेल ने भी इस मामले का विरोध किया था। उन्होंने कहा था, “मैं सोशल डिस्टेंसिंग की निगरानी के लिए हूँ। न कि मैं इस बात को ख्याल रखने के लिए हूँ कि लोग महामारी के दौरान बकरीद के मौके पर घर में नमाज पढ़ रहे या नहीं, भीड़ जुटा रहे या नहीं। लेकिन मुसलमानों को प्रतीकात्मक रूप से कुर्बानी करने के लिए नहीं कहा जा सकता है।”

पूर्व में जारी हुए दिशानिर्देश को “अस्पष्ट और भ्रमित” बताते हुए कई नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। इसके साथ उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से भी मामले में हस्तक्षेप की माँग की थी। प्रतीकात्मक कुर्बानी और ऑनलाइन बकरों की खरीदारी पर समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने भी अपना विरोध दर्ज किया था। उन्होंने कहा था कि वो इस मामले को लेकर शरद पवार से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा था कि अगर गणपति पूजन प्रतीकात्मक नहीं हो सकता, तो मुस्लिमों को क्यों जानवरों की बलि प्रतीकात्मक करने के लिए कहा जाता है?



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