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Monday, August 3, 2020

‘मेरा ध्यान नहीं गया कि बाइक स्टैंड पर खड़ी थी’: CJI पर ट्वीट के लिए प्रशांत भूषण ने माँगी माफी

प्रशांत भूषण

--- ‘मेरा ध्यान नहीं गया कि बाइक स्टैंड पर खड़ी थी’: CJI पर ट्वीट के लिए प्रशांत भूषण ने माँगी माफी लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

वकील प्रशांत भूषण ने सोमवार (3 अगस्त, 2020) को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के खिलाफ अपने ट्वीट को लेकर माफी माँग ली है। इसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के हेलमेट नहीं पहनने को लेकर सवाल किए थे।

प्रशांत भूषण ने माफी मॉंगते हुए कहा है कि वे इस बात पर ध्यान नहीं दे पाए कि सीजेआई जब बाइक पर बैठे थे तो वह स्टैंड पर खड़ी थी। इसके अलावा अवमानना नोटिस के जवाब में उन्होंने किसी अन्य मसले पर खेद नहीं जताया है।

29 जून को प्रशांत भूषण ने बाइक पर बैठे मुख्य न्यायाधीश एसएस बोबडे की एक तस्वीर ट्वीटर पर शेयर की थी। इसमें उन्होंने उनके बिना मास्क और हेलमेट होने को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने इसके लिए माफी माँगते हुए कहा है कि मैंने ध्यान नहीं दिया कि बाइक स्टैंड पर है और स्टैंड पर खड़ी बाइक पर हेलमेट लगाना जरूरी नहीं होता, ऐसे में वो इस बात के लिए माफी माँगते हैं कि उन्होंने हेलमेट को लेकर सीजेआई से सवाल किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जुलाई को प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

अवमानना के नोटिस का जवाब देते हुए प्रशांत भूषण ने 134 पन्नों के इस जवाब में हेलमेट को लेकर जरूर माफी माँगी है, लेकिन इसके अलावा अपनी ओर से कही किसी बात के लिए खेद प्रकट नहीं किया है।

प्रशांत ने न्यायपालिका की विफलताओं पर दिए गए अपने बयानों को सही ठहराते हुए सहारा-बिड़ला डायरी मामले से लेकर लोया की मौत, कलिखो पुल आत्महत्या मामले से लेकर मेडिकल प्रवेश घोटाले तक, मास्टर ऑफ रोस्टर विवाद, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम तक के कई पुराने मामलों का हवाला दिया।

उल्लेखनीय है कि अवमानना कार्यवाही का कारण अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा किए गए 2 ट्वीट हैं। ये ट्वीट 27 जून और 29 जून को किए गए थे। एक ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा था। साथ ही कहा था कि खासकर पिछले 4 मुख्य न्यायधीशों ने देश का लोकतंत्र ध्वस्त करने में अपनी भूमिका निभाई है। वहीं दूसरे ट्वीट में वर्तमान सीजेआई की बाइक के साथ तस्वीर पर सवाल उठाए थे।

अपने एक ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”



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