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Sunday, March 21, 2021

दान मंदिर को, बना दिया गोल्फ कोर्स… 4 लाख मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त कराने के लिए VHP का अभियान

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--- दान मंदिर को, बना दिया गोल्फ कोर्स… 4 लाख मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त कराने के लिए VHP का अभियान लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने देश के 4 लाख मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की है। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने इस तरफ इशारा करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों की सरकारों ने देश के 4 लाख मंदिरों पर कब्ज़ा कर रखा है, जिनसे वो अपील करते हैं कि इन मठों-मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त किया जाए। विहिप जल्द ही इन सरकारों से वार्ताएँ शुरू करेगा।

राज्य सरकारों के साथ वार्ता कर के उन्हें कहा जाएगा कि वो इन मठों-मंदिरों को अपने कब्जे से मुक्त करें। विहिप ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ती है तो इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज किया जाएगा। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, मिलिंद परांडे ने कहा कि समाज हित में उपयोग किए जाने की बजाए दानदाताओं द्वारा मठ-मंदिरों को दी गई जमीनों का उपयोग दूसरे कामों के लिए किया जा रहा है।

संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर सहित कई संगठनों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से विहिप की इस पहल का समर्थन किया है। RSS नेता नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि हिंदू मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए तथा उनका संचालन समाज के स्तर से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर में आए धन का उपयोग सामाजिक कार्यों में होना चाहिए। परांडे ने सभी मंदिरों में हिन्दू धर्म के प्रचार के लिए केंद्र बनाने की बात की।

उन्होंने कहा, “मंदिरों के दान का उपयोग हिंदू संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए। कई सरकारों द्वारा मंदिरों पर कब्जा कर भारतीय संस्कृति को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। कई मंदिरों में तो पूजा-पाठ तक ठीक से नहीं हो रहा है। इसके लिए समाज के लोगों को आगे आकर सरकारों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी समाज को सौंपें। श्रद्धालु ही मंदिरों का प्रबंधन करें।”

उन्होंने इसके लिए आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमला मंदिर का उदाहरण दिया। वहाँ प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं के दान से 1300 करोड़ रुपए आते हैं। इनमें से 85% धनराशि को सीधा सरकारी राजकोष में भेज दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के कहने पर वहाँ के 10 मंदिरों को अपनी जमीन गोल्फ कोर्स बनाने के लिए देनी पड़ी, जबकि हिंदुओं ने इस कार्य के लिए जमीन नहीं दी थी। जमीन का उपयोग धर्म के कार्यों के लिए नहीं हुआ।

मिलिंद परांडे ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा मनमाने ढंग से मंदिरों की सम्पत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही पूछा कि क्या इसीलिए हिन्दू चढ़ावा देते हैं? उन्होंने दूसरे धर्मों-सम्प्रदायों के धार्मिक स्थलों की बात करते हुए कहा कि वहाँ वो लोग खुद उनका प्रबंधन करते हैं। साथ ही सवाल दागा कि फिर हिन्दुओं के लिए ही इस तरह की बंदिश क्यों? हिन्दुओं द्वारा मंदिर को दिए गए धन पर सरकार का अधिकार नहीं होना चाहिए।

तमिलनाडु में सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ‘ईशा फाउंडेशन’ ने इसी तरह का अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने तमिलनाडु का आँकड़ा देते हुए बताया कि वहाँ करीब 12000 मंदिर अवसान की ओर हैं, वो खात्मे की तरफ बढ़ रहे हैं। क्यों? क्योंकि वहाँ पूजा नहीं हो रही है। 34000 मंदिर ऐसे हैं, जिन्हें 10000 रुपए वार्षिक के हिसाब से अपने कामकाज चलाने पड़ते हैं। 37000 मंदिर वहाँ ऐसे हैं, जहाँ सिर्फ एक ही व्यक्ति है, जिसके हाथ में पूजा की पूरी जिम्मेदारी है।



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