--- यमुनानगर में माइक से यति नरसिंहानंद को धमकी दे रही थी मुस्लिम भीड़, समर्थन में उतरे हिंदू कार्यकर्ता: भारी पुलिस बल तैनात लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---
गाजियाबाद के डासना में स्थित शिव-शक्ति धाम के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को धमकी देते हुए देश भर में मुस्लिमों का प्रदर्शन जारी है। कहीं-कहीं यह हिंसक टकराव का रूप लेता जा रहा है। हरियाणा के पानीपत स्थित यमुनानगर में भी ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है। टकराव की स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी है।
पुलिस-प्रशासन ने जब स्थिति को सँभाला तो दोनों पक्ष पीछे हट गए। दरअसल, यहाँ भी कई मुस्लिम संगठन और कट्टरपंथी धमकी देने का काम कर रहे थे, जिससे हिन्दू संगठन के लोग आक्रोशित हो गए। सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को लघु सचिवालय के सामने मुस्लिम समाज के लोग भारी संख्या में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ ज्ञापन देने के लिए पहुँचे थे। पुलिस को अंदेशा नहीं था कि हालात इतने खराब हो जाएँगे।
जब मुस्लिम कट्टरपंथियों के जवाब में हिन्दू कार्यकर्ता आए तो पुलिस ने उन्हें किसी तरह वापस अनाज मंडी गेट तक पहुँचाया। फिर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। सचिवालय के सामने सड़क पर दोनों तरफ लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। जाम को हटाने में कई घंटे लगे। वहाँ मुस्लिम समाज के लोग महंत यति के खिलाफ ज्ञापन लेकर पहुँचे थे।
वहीं दूसरी तरफ हिंदू संघर्ष समिति के कार्यकर्ता भी लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर धरना-प्रदर्शन करने लगे। ये हिन्दू कार्यकर्ता नरसिंहानंद सरस्वती व शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी को जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराने की माँग कर रहे थे। दोनों समुदाय एक ही गेट पर आमने-सामने थे। लिहाजा, पुलिस ने मुस्लिमों को अनाज मंडी के दूसरे वाले गेट के पास भेज दिया। साथ ही माइक और लाउडस्पीकर के प्रयोग पर पाबंदी लगाई।
लेकिन, मुस्लिम भीड़ में शामिल लोग नहीं माने और उन्होंने माइक पर धमकी देनी शुरू कर दी। इससे हिन्दू कार्यकर्ता भी आक्रोशित हो गए। उनकी माँग थी कि भड़काऊ बयानबाजी के लिए इस्तेमाल की जा रही माइक बंद की जाए। साथ ही ‘जय श्री राम’ के नारे से इलाका गूँज उठा। हिन्दू संगठन के कुछ युवाओं और पुलिस के बीच माइक बंद कराने को लेकर बहस भी हुई।
वहाँ जमे मुस्लिमों ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने स्वामी नरसिंहानंद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है और उन्हें यूँ ही बदनाम किया जा रहा है। उच्चाधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर दोनों तरफ से ज्ञापन स्वीकार किया। हिन्दू संगठनों ने कहा कि समाज में द्वेष भावना भड़काने के खिलाफ इन पर मुकदमा किया जाए। असल में आरोप है कि पुलिस ने केवल हिन्दुओं को पहले माइक का इस्तेमाल करने से रोका था, इसलिए ये बवाल हुआ।
महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को लेकर हाल के दिनों में ये पहली घटना नहीं है। कानपुर में AIMIM ने नरसिंहानंद सरस्वती और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के ख़िलाफ़ ‘सिर तन से जुदा’ का पोस्टर लगाया था। 12 अप्रैल को लगाए गए इन आपत्तिजनक व धार्मिक रूप से भड़काऊ पोस्टर को लगाने के संबंध में चमनगंज थाने में धारा 153ए, 295 ए के तहत शिकायत किए जाने के बाद पोस्टर हटा लिया गया।
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