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Saturday, July 10, 2021

भारतीय मूल की सिरिशा बांदला… वायुसेना पायलट नहीं बन सकीं, अब जा रहीं अंतरिक्ष में, होंगी तीसरी ‘इंडियन’ महिला

सिरीशा बांदला अंतरिक्ष

--- भारतीय मूल की सिरिशा बांदला… वायुसेना पायलट नहीं बन सकीं, अब जा रहीं अंतरिक्ष में, होंगी तीसरी ‘इंडियन’ महिला लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के बाद अब भारत की एक और बेटी सिरिशा बांदला अंतरिक्ष की सैर करने वाली हैं। भारतीय मूल की सिरिशा मशहूर उद्योगपति रिचर्ड ब्रैनसन की स्पेस कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक के अंतरिक्ष यान वर्जिन ऑर्बिट में बैठकर रविवार (11 जुलाई 2021) को अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना होंगी। अंतरिक्ष यात्रा पर जा रही ब्रैनसन की टीम में बांदला के अलावा एक दूसरी महिला बेश मोसिस भी शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के गुंटूंर जिले में जन्मी सिरिशा वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी में गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशंस की वॉयस प्रेसीडेंट हैं। वह अमेरिका में टेक्सास के ह्यूस्टन में पली-बढ़ी हैं। भारत में सिरिशा केवल 5 साल तक ही रही हैं। 34 वर्षीय सिरिशा पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल/एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट हैं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की हैं।

सिरिशा बांदला ने महज 6 सालों की नौकरी में ही यह पद हासिल कर लिया है। वह भारतीय मूल की तीसरी ऐसी महिला हैं, जो अंतरिक्ष के सफर पर रवाना होने वाली हैं। इससे पहले सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला अंतरिक्ष में गई थीं। बताया जा रहा है कि ब्रैनसन की टीम में सिरिशा के अलावा चार और लोग भी शामिल हैं।

उन्होंने हाल ही में ट्वीट किया, “मैं यूनिटी22 के बेहतरीन क्रू का हिस्सा बनकर और एक ऐसी कंपनी का साथ पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूँ, जिसका मिशन सभी के लिए अंतरिक्ष को सुगम बनाना है।” सिरिशा के अंतरिक्ष में जाने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हर भारतीय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है और उन्हें ट्विटर पर बधाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि सिरिशा बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनना चाहती थीं। हालाँकि, कमजोर दृष्टि होने के कारण वह वायुसेना में पायलट नहीं बन सकीं। लेकिन अब वह अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्षयात्रियों पर होने वाले असर का अध्ययन भी करेंगी।

सिरिशा के पिता डॉक्टर मुरलीधर एक वैज्ञानिक हैं और अमेरिकी सरकार में वरिष्ठ कार्यकारी सेवा के सदस्य हैं। वहीं, उनके दादा बांदला रगहिया एक कृषि विज्ञानी हैं। वह अपनी पोती की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, “हमेशा उसमें कुछ बड़ा हासिल करने का उत्साह देखता था। आखिरकार वह अपना सपना पूरा करने जा रही है। मुझे विश्वास है कि वह इस मिशन में सफलता हासिल करेगी और पूरे देश को गर्व महसूस कराएगी।”



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