‘महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की ज़रूरत’: जनसंख्या नियंत्रण पर आमने-सामने बिहार के CM और डिप्टी CM - News Times Indians

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Monday, July 12, 2021

‘महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की ज़रूरत’: जनसंख्या नियंत्रण पर आमने-सामने बिहार के CM और डिप्टी CM

जनसंख्या, नीतीश कुमार, रेणु देवी, बिहार

--- ‘महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की ज़रूरत’: जनसंख्या नियंत्रण पर आमने-सामने बिहार के CM और डिप्टी CM लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

बिहार में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री रेणु देवी आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा लाए गए जनसंख्या नियंत्रण कानून के ड्राफ्ट को लेकर नीतीश से सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि इसके लिए महिलाओं का शिक्षित होना ज्यादा ज़रूरी है। हालाँकि, राज्य में उनकी डिप्टी और सत्ता में जदयू की साझीदार भाजपा की रेणु देवी इत्तिफ़ाक़ नहीं रखतीं।

रेणु देवी ने एक लिखित बयान जारी कर कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक किए जाने की ज़रूरत है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि अगर महिलाएँ पढ़ी-लिखी होंगी तो उनके अंदर ज्यादा जागृति होगी और प्रजनन दर अपने आप कम हो जाएगी। जबकि रेणु देवी ने कहा कि पुरुषों के भीतर नसबंदी को लेकर डर की स्थिति है और वो नसबंदी नहीं कराना चाहते।

रेणु देवी ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि बिहार के कई जिलों में पुरुषों में नसबंदी की दर मात्र 1% है। उन्होंने कहा, “अक्सर यह देखा गया है कि बेटे की चाहत में पति और ससुराल वाले महिला पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं। इससे परिवार का आकार बड़ा होता चला जाता है। ये ज़रूरी है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों एवं महिलाओं के बीच भेदभाव समाप्त किया जाए। तभी हम इसमें सफल होंगे।”

जबकि नीतीश कुमार ने बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को गैर-ज़रूरी बताया था। वहीं रेणु देवी ने उत्तर प्रदेश में आए कानूनी डाफ्ट की सराहना करते हुए कहा कि बिहार में प्रजनन दर वहाँ से भी अधिक है, इसीलिए यहाँ भी इसी तरह का कानून बनना चाहिए। उप-मुख्यमंत्री ने अपने बयान में ये भी कहा कि बिहार देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के शिविरों में भी गर्भ-निरोधक गोलियों के वितरण, परिवार नियोजन के उपायों की जानकारी और सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वो बेटा-बेटी को एक ही समझें। साथ ही बताया कि फ़िलहाल बिहार में प्रजनन दर 3.0 है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अनियंत्रित जनसंख्या विकास में बाधक होती है, इसीलिए खुशहाली के लिए जनसंख्या का स्थिर होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, कुपोषण में कमी, साक्षरता दर बढ़ाने और परिवार नियोजन के बारे में व्यापक जागरूकता लाने के काम राज्य में हो रहे हैं और इसके अच्छे परिणाम मिले हैं, लेकिन इसमें और तेज़ी लाने की ज़रूरत है।

बिहार की उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ के लिए सरकारी अस्‍पतालों में कई सुविधाएँ दी जाती हैं, लेकिन इन सुविधाओं का लाभ वास्तविक ज़रूरतमंदों तक तभी पहुँचेगा जब पुरुष जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए चलाए जा रहे अभियानों में युद्धस्तर की तेज़ी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ ‘लैंगिक असमानता (Gender Inequality)’ पर भी काम करने पर बल दिया।

बता दें कि यूपी के नए ड्राफ्ट में दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन और प्रमोशन का मौका नहीं मिलेगा। 77 सरकारी योजनाओं और अनुदान से भी वंचित रखने का प्रावधान है। अगर यह लागू हुआ तो एक साल के भीतर सभी सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ-पत्र देना होगा कि वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। अगर अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं और नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें कई सुविधाएँ देने की सिफारिश की गई है। 



from ऑपइंडिया https://ift.tt/3AWtxS4

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages