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Monday, August 30, 2021

ढह गया ‘केरल मॉडल’: राज्य में पिछले 5 दिनों में कोरोना के 1.5 लाख से अधिक नए मामले, देश में अकेले 68% की हिस्सेदारी

केरल मॉडल कोरोना

--- ढह गया ‘केरल मॉडल’: राज्य में पिछले 5 दिनों में कोरोना के 1.5 लाख से अधिक नए मामले, देश में अकेले 68% की हिस्सेदारी लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

केरल में कोरोना की बेकाबू रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आँकड़ों के मुताबिक, पिछले पाँच दिनों में केरल में कोविड-19 के 1.5 लाख से अधिक नए मामले सामने आए हैं। राज्य में कोरोना के दर्ज किए गए नए मामले पिछले पाँच दिनों में देश में दर्ज किए गए कुल मामलों का 68% से अधिक है। इस समय भारत में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 2,26,067 है, जबकि केरल में 1,55,424 मामले दर्ज किए गए हैं।

केरल में हर दिन दर्ज होने वाले कोरोना के नए मामले

25 अगस्त को केरल में 31,445 (भारत में कुल मामलों का 67.9%) नए मामले दर्ज किए गए, जबकि उस दिन भारत में कुल कोरोना मामलों की संख्या 46,280 थी।

केरल और भारत में 25 अगस्त को दर्ज किए गए मामले। Source: Covid19india.org

26 अगस्त को, केरल में 30,077 (भारत में कुल मामलों का 67.5%) नए मामले सामने आए, जबकि देश के बाकी हिस्सों में केवल 14,473 मामले सामने आए।

केरल और भारत में 26 अगस्त को दर्ज किए गए मामले। Source: Covid19india.org

27 अगस्त को, केरल में पिछले दिन की तुलना में 2,000 से अधिक मामलों की बढ़त के साथ (भारत में कुल मामलों का 70.07%) इस दिन यहाँ कोरोना के 32,801 नए मामले दर्ज किए गए। उसी दिन भारत में कुल कोविड-19 मामलों की संख्या 46,806 थी।

केरल और भारत में 27 अगस्त को दर्ज किए गए मामले। Source: Covid19india.org

28 अगस्त को, केरल में 31,265 (भारत में कुल मामलों का 69.3%) नए मामले दर्ज किए, जबकि भारत में नए मामलों की कुल संख्या 45,064 थी।

केरल और भारत में 28 अगस्त को दर्ज किए गए मामले। Source: Covid19india.org

29 अगस्त को, केरल में 29,836 (भारत में कुल मामलों का 68.7%) नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए, जबकि भारत में नए मामलों की कुल संख्या 43,367 थी।

केरल और भारत में 29 अगस्त को दर्ज किए गए मामले। Source: Covid19india.org

ढह गया केरल मॉडल

केरल का कोविड-19 प्रबंधन, जिसे अक्सर केरल मॉडल कहा जाता है, इसकी शुरुआत में मीडिया और लिबरल लोगों द्वारा ‘महामारी को नियंत्रित करने’ के लिए सराहना की गई थी। वास्तव में, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों ने फरवरी और मार्च 2020 की शुरुआत में ही घोषणा कर दी थी कि केरल ने महामारी पर पूरी तरह से काबू पा लिया है। हालाँकि, शुरुआत में सबसे अच्छे कोविड-19 प्रबंधन के लिए अपनी पीठ थपथपाने वाले राज्य का केरल मॉडल ताश के पत्तों की तरह ढह गया था। राज्य की वर्तमान स्थिति देखने के बाद अब कोई केरल मॉडल की सराहना नहीं कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब पूरे देश में केरल ही एक मात्र ऐसा राज्य है, जहाँ कोरोना के सबसे अधिक नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

वहीं, बात करें देश के बाकी हिस्सों की तो वह कोरोना महामारी पर काबू पाने में सफल हुए हैं। केरल नए मामलों में अभी भी सबसे आगे है। ध्यान दें केरल में प्रति दिन लगभग 70% नए कोरोना के मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि यह भारत की कुल आबादी का सिर्फ 3% है। केरल का औसत पॉजिटिविटी रेट, जाँच किए गए प्रत्येक 100 लोगों के पॉजिटिव मामलों की तुलना में 18.5 प्रतिशत है।

वर्तमान में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश एक दिन में 50 से भी कम नए मामले दर्ज कर रहा है। केरल पिछले 5 दिनों से 30,000 के करीब मामले दर्ज कर रहा है। हाल ही में, रॉयटर्स जैसे मीडिया घरानों ने कोरोना के कुप्रबंधन को लेकर केरल सरकार को क्लीन चिट देने का प्रयास किया, जिसकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी आलोचना की गई।

शुक्रवार को, रॉयटर्स ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था, ‘Kerala’s COVID-19 lessons for India and Modi’s government’। उन्होंने पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार को कोविड-19 महामारी के प्रभावी संचालन के लिए धन्यवाद भी कहा।

ऐसे में जब यहाँ मामले इतने अधिक हैं, तो राज्य सरकार को परीक्षण बढ़ाना चाहिए ताकि संक्रमण का पता लगाया जा सके और उस पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन केरल ने इस समय जाँच भी कम कर दी है। केरल सरकार में ‘नो टेस्ट, नो केस’ नया मंत्र लगता है। द हिंदू बिजनेसलाइन में 23 अगस्त की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल में कोरोना मामलों की जाँच में पिछले दो हफ्तों में लगभग एक तिहाई की कमी आई है।

कोरोना महामारी पर अंकुश लगाने में केरल सरकार पूरी तरह से असफल रही है। इसके चलते हिंदू समुदाय अपने आने वाले त्योहार को भी नहीं मना सकेंगे, क्योंकि अन्य राज्य सरकारों पर इसका दबाव होगा कि केरल मॉडल को न दोहराया जाए। केरल में रहने वाले हिंदू परिवार, जिन्होंने पिछले 18 महीनों में महामारी के कारण कोई त्योहार नहीं मनाया हैं, वे उत्सव मनाने का इंतजार कर रहे हैं।



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