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Sunday, August 8, 2021

‘दोषी मुस्लिम भी हो तो फाँसी पर लटका दूँगा’: गुस्से से लाल थे राजेश पायलट, RSS दफ्तर में ब्लास्ट से मरे थे 11 स्वयंसेवक

RSS, चेन्नई, बम ब्लास्ट

--- ‘दोषी मुस्लिम भी हो तो फाँसी पर लटका दूँगा’: गुस्से से लाल थे राजेश पायलट, RSS दफ्तर में ब्लास्ट से मरे थे 11 स्वयंसेवक लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

आज से 28 साल पहले तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दफ्तर को आतंकियों ने निशाना बनाया गया। वो 8 अगस्त, 1993 का ही दिन था जब चेन्नई में RSS के दफ्तर हुए बम ब्लास्ट में 11 स्वयंसेवकों की जान चली गई थी। इनमें से 5 संघ के प्रचारक थे। उस समय केंद्र में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार थी और पीवी नरसिंहा राव भारत के प्रधानमंत्री थे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण तब देश के गृह मंत्री हुआ करते थे।

वहीं तमिलनाडु की बात करें तो वहाँ AIADMK की सरकार थी और जयललिता पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं। तब बाबरी विध्वंस और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के कारण देश की राजनीति उबाल पर थी। साथ ही श्रीलंका में तमिल अलगावादियों ने वहाँ की सरकार के दाँत खट्टे कर रखे थे। इस घटना से सवा 2 साल पहले ही मई 1991 में तमिलनाडु के ही कांचीपुरम स्थित श्रीपेरुम्बुदुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की एक बम ब्लास्ट में हत्या कर दी गई थी।

लालकृष्ण आडवाणी ने चेन्नई के RSS दफ्तर में मारे गए स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि भी दी थी। बॉम्बे और कलकत्ता (मुंबई और कोलकाता) में बम ब्लास्ट हो चुके थे, ऐसे में दिल्ली की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी क्योंकि आशंका थी कि आतंकी राष्ट्रीय राजधानी को निशाना बना सकते हैं। ये बात तब की है, जब चेन्नई, मद्रास हुआ करता था। चेटपेट इलाके में स्थित RSS की इमारत में रात के समय जोरदार धमाका हुआ।

11 स्वयंसेवकों की मौत हो गई और 7 घायल हुए। मृतकों में दो महिलाएँ भी शामिल थीं। RSS मुख्यालय के सेक्रेटरी वी काशीनाथन की भी इस हमले में जान चली गई। देश में इस घटना के कारण काफी खलबली मची थी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट तुरंत मद्रास पहुँचे थे। बताते चलें कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे सचिन पायलट उन्हीं के बेटे हैं। राजेश पायलट की जून 2011 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी।

RSS के स्थानीय नेताओं ने तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट को जानकारी दी थी कि ‘पलानी बाबा’ नाम के एक इस्लामी कट्टरवादी ने इस धमाके के पिछले महीने ताम्बरम में अपने अनुयायियों को भड़काते हुए RSS के मुख्यालय व कांची शंकराचार्य मठ में बम विस्फोट करने के लिए कहा था। ‘पलानी बाबा’ पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और प्रतिबंधित ‘इस्लामिक सेवक संघ’ से जुड़ा हुआ था।

राजेश पायलट ये सुनते ही गुस्से से लाल हो गए थे और उन्होंने कहा था, “मैं दोषियों को फाँसी पर लटका दूँगा, वो मुस्लिम ही क्यों न हो।” लालकृष्ण आडवाणी भी चेन्नई पहुँचे थे और इस बम ब्लास्ट को पिछले 2 बड़े ब्लास्ट्स से जोड़ते हुए सरकार को चेताया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकियों के तमिलनाडु में सक्रिय होने की ख़ुफ़िया सूचना मिलने के बावजूद केंद्र व राज्य की सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहीं।

जब RSS में बम ब्लास्ट के कारण दिल्ली तक के नेता वहाँ पहुँच रहे थे, जब जयललिता पलानी में चुनाव प्रचार के लिए निकली हुई थीं। तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल एम चन्ना रेड्डी ने इसके लिए उनकी आलोचना भी की थी। जयललिता ने बाद में सफाई में कहा था कि उन्हें इस बम विस्फोट की तीव्रता व इससे हुए नुकसान का अंदाज़ा नहीं था। राज्यपाल ने पुलिस और मुख्य सचिव की भी उनकी निष्क्रियता के लिए आलोचना की थी।

‘पलानी बाबा’ के बारे में बता दें कि इस बम ब्लास्ट के पौने 4 साल बाद फरवरी 1997 में उसकी भी हत्या हो गई थी, जिसके बाद तमिलनाडु के कई हिस्सों में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क गए थे। इसी साल जनवरी में भाजपा के स्टेट एग्जीक्यूटिव सदस्य एसडी माणिक्कम की हत्या हुई थी। तब तक तमिलनाडु में करुणानिधि के DMK की सरकार आ चुकी थी। गणेश पूजा के जुलूस को मुस्लिम इलाकों से नहीं गुजरने दिया गया।

‘मुनेत्र कझगम’ नाम के एक इस्लामी चरमपंथी संगठन ने तो राजभवन पर ही कब्ज़ा करने की कोशिश की थी, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया था। ये भी जानने लायक है कि RSS के चेन्नई दफ्तर में हुए बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपित मुस्ताक अहमद इस घटना के 25 साल बाद जनवरी 2018 में धराया। CBI ने उसे चेन्नई से दबोचा था। वो तमिलनाडु के आतंकी संगठन ‘अल उम्माह’ का सरगना था।

59 वर्षीय मुस्ताक अहमद पर तब पुलिस ने 10 लाख रुपए का इनाम रखा था। बम ब्लास्ट में इस्तेमाल किए गए RDX का इंतजाम उसी ने किया था और अन्य आतंकियों को शरण दी थी। इस मामले की जाँच CB-CID को सौंपी गई थी। इसके बाद 1994 में 18 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। इस मामले में 431 गवाह थे। जून 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 11 को दोषी ठहराया और 4 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। एक अन्य आरोपित इमाम अली मुठभेड़ में मारा गया था।



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