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Saturday, August 28, 2021

एक साथ दिखे ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर तो सपा में शामिल हुए मुख्तार अंसारी के भाई और चौधरी: जानिए UP में इसके सियासी मायने

ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर

--- एक साथ दिखे ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर तो सपा में शामिल हुए मुख्तार अंसारी के भाई और चौधरी: जानिए UP में इसके सियासी मायने लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी काफी बढ़ गई है। हर पार्टी अपने सियासी समीकरण साधने की तैयारी में जुटी हुई है। इस बार AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी यूपी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाले हैं। वे ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी संग मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। 

ओवैसी की चंद्रशेखर से मुलाकात

लेकिन अब कहा जा रहा है कि ओवैसी के इस चुनावी गठबंधन का विस्तार हो सकता है। वे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद संग हाथ मिला सकते हैं। दलित वोटों को ध्यान में रखते हुए ओवैसी ये बड़ा फैसला ले सकते हैं। ये अटकलों का दौर इसलिए शुरू हुआ है क्योंकि हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की चंद्रशेखर से अहम मुलाकात हुई है। उस मुलाकात में ओम प्रकाश राजभर भी शामिल हुए। शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को दोनों नेताओं से मुलाकात के बाद ओवैसी ने मीटिंग की फोटो अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की। इस तस्वीर के आते ही तीनों दलों के एकसाथ आने की अटकलें लगनी शुरू हो गई। 

गठबंधन या फिर कोई और रणनीति?

अब किन मुद्दों पर चर्चा हुई, किन बातों पर सहमति बनी, ये सब साफ नहीं हुआ है। लेकिन क्योंकि चुनावी मौसम में AIMIM चीफ ने ये मुलाकात की है, ऐसे में इसके अलग ही सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। वैसे भी जब से बसपा प्रमुख मायावती द्वारा चंद्रशेखर को नजरअंदाज कर दिया गया है, अखिलेश ने भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, ऐसे में भीम आर्मी को भी यूपी में किसी का साथ चाहिए। उसी साथ को पाने के लिए अगर चंद्रशेखर, असदुद्दीन ओवैसी संग कोई करार करें तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

इस गठबंधन के सहारे दलित और पिछड़े वोट बैंक के साथ मुस्लिम वोट को भी अपने पक्ष में किया जा सकता है। अगर ये तीनों दल एक साथ आते हैं तो विधानसभा चुनाव में कई पार्टियों के लिए राजनीतिक समीकरण बदल जाएँगे। यादव, मुस्लिम और पिछड़े वोट बैंक के सहारे लखनऊ पहुँचने की तैयारी कर रहे अखिलेश यादव पर भी इस संभावित गठबंधन का प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही दलित-ब्राह्मण वोट बैंक के जरिए सत्ता की चाभी पाने का सपना देख रही मायावती की पार्टी बसपा के लिए राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

हालाँकि, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कई बड़ी पार्टियाँ बड़े दलों के साथ गठबंधन करने के बजाय छोटी पार्टियों को साथ लाने की कोशिश कर रही हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसी को ध्यान में रखते हुए जनवादी पार्टी और महान दल जैसी छोटी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। अखिलेश कई और छोटे दलों को भी साथ लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी सपा में शामिल

लखनऊ में शनिवार (अगस्त 28, 2021) को समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में माफिया डॉन और बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी अपने बेटे के साथ पार्टी की सदस्यता ले ली है। इसके साथ ही अम्बिका चौधरी ने भी बेटे बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद चौधरी से साथ घर वापसी की। मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे अम्बिका चौधरी लोकसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे। अब वह फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।

सिबगतुल्लाह अंसारी के साथ उनके बेटे मन्नू अंसारी को अखिलेश यादव ने पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई। मुहम्मदाबाद विधानसभा से दो बार विधायक रहे चुके मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से हारे थे। कौमी एकता दल का गठन करने वाले सिबगतुल्लाह अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हेंं या उनके बेट को 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट देगी।

राज्य में सत्ताधारी भाजपा भी छोटे दलों की नाराजगी दूर कर गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी इस बार भी अपना दल, निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 32 छोटी पार्टियों ने चुनाव लड़ा था। जिसमें उनके प्रत्याशियों को काफी अच्छी संख्या में वोट मिले थे। इसलिए इस बार के चुनाव में सभी पार्टियाँ अपनी दावेदारी मजबूती से पेश करने के लिए छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश कर रही हैं।



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