पत्नी की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं… लेकिन यौन सुख के लिए निजी अंग में ऊँगली व मूली करना अपराध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - News Times Indians

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Thursday, August 26, 2021

पत्नी की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं… लेकिन यौन सुख के लिए निजी अंग में ऊँगली व मूली करना अपराध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

--- पत्नी की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं… लेकिन यौन सुख के लिए निजी अंग में ऊँगली व मूली करना अपराध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि पति द्वारा पत्नी के साथ जबरदस्ती बनाया गया शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा। कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया और पति को ‘वैवाहिक बलात्कार’ (Marital Rape) के आरोपों से मुक्त कर दिया है। हालाँकि, कोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ अपनी पत्नी से अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में धारा 377 के तहत मामला चलाने की अनुमति दी।

कोर्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया बलात्कार नहीं है, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो, अगर पत्नी की उम्र अठारह वर्ष से अधिक है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन कृत्य, जिसकी पत्नी अठारह वर्ष से कम उम्र की न हो, बलात्कार नहीं है। इस मामले में शिकायतकर्ता आवेदक नंबर 1 की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, इसलिए आवेदक नंबर 1/पति द्वारा उसके साथ संभोग करना या कोई भी यौन कृत्य करना, बलात्कार का अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।”

कोर्ट ने यह भी कहा, “हालाँकि, प्राइवेट पार्ट में उँगली और मूली डालने के अलावा उसने और क्या अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए, शिकायतकर्ता ने यह नहीं बताया। केवल इस आधार पर आईपीसी की धारा 377 के तहत तय किए गए लगाए गए आरोपों को गलत नहीं कहा जा सकता है। खासकर आईपीसी की धारा 377 के संदर्भ में, जहाँ अपराधी का इरादा बार-बार पीड़ित के प्राइवेट पार्ट में किसी वस्तु को डाल कर अप्राकृतिक यौन संतुष्टि पाना था और ऐसा कृत्य आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध है।”

बता दें कि इस मामले में सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक आपराधिक रिवीजन दायर की गई थी। सत्र न्यायालय ने पत्नी की शिकायत पर पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 34, 376 और 377 के तहत और ससुराल पक्ष के खिलाफ 498ए के तहत आरोप तय किए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही वे उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे और उसके साथ शारीरिक हिंसा की। पति के खिलाफ आरोप यह था कि उसने विरोध के बावजूद पत्नी की योनि (Vagina) में उँगलियाँ और मूली डालकर उसके साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए।

रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पति को आईपीसी की धारा 376 के तहत आरोपमुक्त कर दिया और आईपीसी की धारा 377, 498ए और 34 के तहत आरोपों को बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध को ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को जमानत दे दी थी।

दरअसल, नाबालिग लड़की ने अपने वयस्क पति खुशाबे अली के खिलाफ दहेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाने के आरोप में मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपित पति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह फैसला सुनाया।



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